प्रेगनेंसी में कौन सा योग ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है?
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प्रेगनेंसी में कौन सा योग ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद है?

Table of Contents

Summary

  • गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रीनेटल योगासनों, उनके फायदों और बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में सही वैज्ञानिक और डॉक्टर-प्रमाणित जानकारी होनी चाहिए।
  • प्रेगनेंसी की अलग-अलग तिमाहियों (Trimesters) में शरीर की बदलती जरूरतों के हिसाब से प्रेगनेंसी में योग कैसे करें और प्रेगनेंसी में कौन सा योग नहीं करना चाहिए, इसकी पूरी लिस्ट दी गई है।
  • घर पर अकेले योग करने की बजाय एक्सपर्ट गाइडेंस और डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है, ताकि नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़े और कोई मेडिकल कॉम्प्लिकेशन न हो।

इस बात को हम कई बार अपने ब्लॉग के माध्यम से कह रहे हैं कि मां बनना हर महिला के जीवन का खूबसूरत पल होता है। जब आपके भीतर एक नन्ही सी जान धड़कने लगती है, तो आपकी पूरी दुनिया बदल जाती है। इस सफर में जितनी खुशी होती है, उतना ही मन में डर और अनगिनत सवाल भी होते हैं जैसे कि - "क्या मैं जो खा रही हूँ वो सही है?", "क्या मेरा उठना-बैठना बच्चे के लिए सुरक्षित है?" और सबसे बड़ा सवाल कि "प्रेगनेंसी में योग" करना कितना सही है? 

अगर आप भी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि इस दौरान कौन से कदम उठाने चाहिए, तो घबराइए मत। सीएमआरआई (CMRI) के अनुभवी और संवेदनशील विशेषज्ञों की टीम हमेशा आपकी इस खूबसूरत यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए आपके साथ है। अपनी और अपने आने वाले बच्चे की बेहतर सेहत के लिए आज ही हमारे अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों से अपॉइंटमेंट बुक करें और एक सुरक्षित मातृत्व की ओर कदम बढ़ाएं।

प्रीनेटल योग क्या है और यह कैसे अलग है?

अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि जो योग वे सालों से करती आ रही हैं, वही प्रेगनेंसी में भी जारी रखा जा सकता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में 'रिलैक्सिन' (Relaxin) नाम का हार्मोन तेजी से रिलीज होता है, जो आपके लिगामेंट्स और जोड़ों को ढीला करता है ताकि डिलीवरी में आसानी हो। ऐसे में नॉर्मल योग करने से जोड़ों में चोट या खिंचाव का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए 'प्रीनेटल योगा' (Prenatal Yoga) को डिजाइन किया गया है।

रेगुलर योगा और प्रीनेटल योग में मुख्य अंतर क्या है?

गर्भावस्था के दौरान शरीर के अंदरूनी और बाहरी हिस्से में जो बदलाव आते हैं, उन्हें समझे बिना योग करना खतरनाक हो सकता है। रेगुलर योगा और प्रीनेटल योगा के बीच के अंतर को समझना हर गर्भवती महिला के लिए बेहद जरूरी है -

  1. पेट पर दबाव (Abdominal Pressure): रेगुलर योग में कपालभाति, पश्चिमोत्तानासन या नौकासन जैसे आसन शामिल होते हैं, जिनमें पेट की मांसपेशियों पर सीधा और तेज दबाव पड़ता है। इसके विपरीत, प्रीनेटल योग में केवल उन्हीं आसनों को शामिल किया जाता है जहां पेट पूरी तरह से रिलैक्स रहे और बच्चे के लिए गर्भाशय में पर्याप्त जगह बनी रहे।
  2. स्ट्रेचिंग की सीमा (Limits of Stretching): रेगुलर योग में शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाने के लिए डीप स्ट्रेचिंग की जाती है। जैसा कि हमने पहले बताया, रिलैक्सिन हार्मोन के कारण प्रेगनेंसी में जोड़ पहले से ही कोमल होते हैं। इसलिए प्रीनेटल योग में कभी भी 'ओवर-स्ट्रेचिंग' नहीं की जाती, बल्कि केवल हल्की मोबिलिटी (गतिशीलता) पर ध्यान दिया जाता है।
  3. पीठ के बल लेटना (Lying on the Back): रेगुलर योग में पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले कई आसन (जैसे चक्रासन, हलासन) होते हैं। लेकिन प्रेगनेंसी के पहले ट्राइमेस्टर के बाद पीठ के बल लेटने से 'इन्फीरियर वेना कावा' (Inferior Vena Cava) नाम की मुख्य नस पर दबाव पड़ता है, जिससे बच्चे तक ऑक्सीजन और खून की सप्लाई कम हो सकती है। प्रीनेटल योगा में हमेशा बाईं करवट (Left Lateral Position) लेकर या बैठकर ही अभ्यास कराया जाता है।
  4. सांस लेने का तरीका (Breathing Techniques): रेगुलर योग में सांस को रोकने (कुंभक) या बहुत तेजी से सांस लेने-छोड़ने (जैसे भस्त्रिका) का अभ्यास होता है। प्रीनेटल योग में सांस को रोकना सख्त मना है। इसमें केवल गहरी, शांत और निरंतर सांस लेने की प्रक्रिया (Deep Diaphragmatic Breathing) सिखाई जाती है ताकि बच्चे को भरपूर ऑक्सीजन मिले।

प्रेगनेंसी में कौन सा योग ज्यादा सुरक्षित है?

Best yoga pose for pregnant women

जब आप प्रेगनेंसी के दौर से गुजर रही होती हैं, तो आपके मन में अक्सर यह सवाल घूमता है कि प्रेगनेंसी में कौन कौन से योग करना चाहिए? मेडिकल रिसर्च और स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित योगासन इस समय में सबसे ज्यादा सुरक्षित और असरदार माने गए हैं - 

1. मार्जरीआसन (Cat-Cow Pose)

यह आसन रीढ़ की हड्डी के लिए एक वरदान की तरह है। प्रेगनेंसी में जैसे-जैसे बच्चे का वजन बढ़ता है, महिलाओं की पीठ के निचले हिस्से (Lower Back) पर बहुत ज्यादा दबाव आने लगता है। मार्जरीआसन करने से रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है, पीठ का दर्द दूर होता है और यह बच्चे को सही पोजीशन (Head-down position) में आने में भी मदद करता है।

2. बद्ध कोणासन (Butterfly Pose)

अगर आप जानना चाहती हैं कि प्रेगनेंसी में योग करने का सबसे बड़ा फायदा पेल्विक एरिया को कैसे मिलता है, तो तितली आसन इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। यह हिप्स को ओपन करता है और जांघों व पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। नियमित रूप से बद्ध कोणासन करने से नॉर्मल डिलीवरी के समय होने वाले स्ट्रेस और दर्द को सहने में मदद मिलती है।

3. ताड़ासन (Palm Tree Pose)

गर्भावस्था में वजन बढ़ने के कारण शरीर का सेंटर ऑफ ग्रेविटी बदल जाता है, जिससे कई बार महिलाएं संतुलन खोने लगती हैं। ताड़ासन करने से शरीर का पोस्चर (Posture) सुधरता है, पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।

4. सुखासन में बैठकर प्राणायाम (दीवार या कुशन के सहारे)

मानसिक शांति के लिए अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम सबसे सुरक्षित हैं। यह प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले मूड स्विंग्स, एंग्जायटी और डिप्रेशन को दूर रखने में मदद करते हैं।

मां और बच्चे के लिए प्रीनेटल योगा के फायदे

मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रीनेटल योगा मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है - 

  • दर्द से राहत और नॉर्मल डिलीवरी: यह प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले पीठ, कूल्हों और पैरों के दर्द को कम करता है। पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत और लचीली होने से नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ती है।
  • तनाव में कमी और बेहतर नींद: योग से स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल) का स्तर घटता है, जिससे अनिद्रा (Insomnia) दूर होती है। मां के शांत रहने का सीधा सकारात्मक असर बच्चे के दिमागी विकास पर पड़ता है।
  • शिशु तक ऑक्सीजन की सप्लाई: प्राणायाम से मां के खून में ऑक्सीजन का स्तर सुधरता है, जो प्लेसेंटा के माध्यम से शिशु तक पहुंचकर उसकी ग्रोथ में मदद करता है।

योग करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • पहनावा और हाइड्रेशन: हमेशा आरामदायक सूती कपड़े पहनें। योग के पहले और बीच में पानी पीती रहें, क्योंकि डिहाइड्रेशन से समय से पहले संकुचन (Preterm Contractions) का खतरा रहता है।
  • सुरक्षित माहौल: कमरे का तापमान सामान्य रखें और हॉट योगा से पूरी तरह बचें। संतुलन खोने से बचने के लिए हमेशा दीवार, कुर्सी या योग ब्लॉक (प्रॉप्स) का सहारा लें।
  • शरीर की सुनें: योग में कभी भी जबरदस्ती न करें। असुविधा, दर्द या चक्कर आने पर तुरंत रुक जाएं।

इन आसनों से पूरी तरह दूरी बनाएं

  • पेट और पीठ के बल लेटना: पेट के बल लेटने वाले आसन यूट्रस और भ्रूण पर सीधा दबाव डालते हैं। वहीं, सेकंड और थर्ड ट्राइमेस्टर में पीठ के बल लेटने से ब्लड सप्लाई बाधित हो सकती है।
  • गहरी मरोड़ (Deep Twisting) और उलटे आसन: अत्यधिक मरोड़ वाले आसनों से प्लेसेंटा अपनी जगह से हट सकता है (Placental Abruption)। शीर्षासन जैसे उलटे आसनों में गिरने का रिस्क होता है।
  • सांस रोकना: कुंभक या तीव्र कपालभाति जैसे प्राणायाम से बच्चे तक ऑक्सीजन की सप्लाई रुक सकती है।

डॉक्टर से सलाह कब है जरूरी? - हाई-रिस्क प्रेगनेंसी

यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी समस्या है, तो गाइनोकोलॉजिस्ट की अनुमति के बिना योग शुरू न करें:

  • प्रीविया प्लेसेंटा (Placenta Previa) या कमजोर गर्भाशय ग्रीवा।
  • ब्लीडिंग/स्पॉटिंग या पहले कभी मिसकैरेज/प्री-टर्म लेबर का इतिहास।
  • जुड़वां या उससे ज्यादा बच्चे होना (Multiple Pregnancy)।
  • हृदय रोग या गंभीर हाई ब्लड प्रेशर

खतरे के संकेत: चक्कर आना, सिरदर्द, सीने में दर्द, योनि से पानी/खून का रिसाव होना या बच्चे की हलचल कम महसूस होने पर योग तुरंत रोक दें और डॉक्टर से परामर्श लें।

निष्कर्ष

प्रीनेटल योग बेहद सुरक्षित और फायदेमंद है, बशर्ते इसे सही गाइडेंस में किया जाए। इंटरनेट की आधी-अधूरी जानकारी या रैंडम वीडियो देखकर खुद से प्रयोग करने से बचें। सुरक्षा सबसे पहले आती है, इसलिए कोई भी नया आसन शुरू करने से पहले हमेशा एक योग्य और अनुभवी डॉक्टर या विशेषज्ञ मेडिकल टीम की राय अवश्य लें। इसके लिए आप हमारे अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या सभी प्रेग्नेंट महिलाएं योग कर सकती हैं?

नहीं, जिन महिलाओं की प्रेगनेंसी में कॉम्प्लिकेशन हैं (जैसे प्लेसेंटा प्रीविया या प्री-टर्म लेबर का खतरा), उन्हें योग नहीं करना चाहिए। योग शुरू करने से पहले हमेशा अपनी गाइनोकोलॉजिस्ट से हरी झंडी जरूर लें।

प्रेगनेंसी में कौन-कौन से योगासन सुरक्षित हैं?

प्रेगनेंसी में मार्जरीआसन (Cat-Cow Pose), बद्ध कोणासन (Butterfly Pose), ताड़ासन और दीवार के सहारे किए जाने वाले हल्के स्ट्रेचिंग आसन सबसे ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद माने जाते हैं।

क्या योग से नॉर्मल डिलीवरी में मदद मिलती है?

हां, प्रीनेटल योग पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाता है। इसके साथ ही सांस लेने की सही तकनीक (Breathing techniques) प्रसव के समय दर्द को सहने और नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाने में मदद करती है।

प्रेगनेंसी के किस महीने से योग शुरू कर सकते हैं?

आमतौर पर, पहली तिमाही (पहले 3 महीने) के बाद, यानी चौथे महीने से प्रीनेटल योग शुरू करना सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि शुरुआती 3 महीनों में मिसकैरेज का रिस्क सबसे ज्यादा होता है।

क्या योग से प्रेगनेंसी में दर्द और तनाव कम होता है?

बिल्कुल, योग करने से शरीर में हैप्पी हार्मोन्स (एंडोर्फिन) रिलीज होते हैं जो तनाव और एंग्जायटी को कम करते हैं। साथ ही, कोमल स्ट्रेचिंग से पीठ और कूल्हों के दर्द में भारी आराम मिलता है।

कौन से योगासन प्रेगनेंसी में नहीं करने चाहिए?

पेट के बल लेटने वाले आसन (भुजंगासन), पीठ के बल लेटने वाले आसन (आखिरी महीनों में), गहरे मरोड़ वाले (Deep Twists) और शीर्षासन जैसे उलटे होने वाले आसनों से पूरी तरह बचना चाहिए।

क्या बिना ट्रेनर के घर पर योग करना सुरक्षित है?

नहीं, बिना किसी सर्टिफाइड प्रीनेटल योग एक्सपर्ट के घर पर अकेले योग करना सुरक्षित नहीं है। गलत पोस्चर या गलत आसन से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है। हमेशा किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही योग करें।

क्या प्रेगनेंसी के दौरान योग करने से जेस्टेशनल डायबिटीज नियंत्रित रहती है?

हां, मेडिकल रिसर्च के अनुसार नियमित रूप से सुरक्षित प्रीनेटल योग और वॉक करने से शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधरती है, जिससे गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रण में रहता है।

Written and Verified by:

Dr. Manjari Chatterjee

Dr. Manjari Chatterjee

Consultant Exp: 28 Yr

Obstetrics and Gynaecology

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Dr. Manjari Chatterjee is a Consultant Obstetrician & Gynaecologist Dept. at CMRI, Kolkata with over 15 years of experience. She specializes in high-risk obstetrics, infertility procedures, and complex gynaecology including IVF, fibroid & ovary surgeries.

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