
इस बात को हम कई बार अपने ब्लॉग के माध्यम से कह रहे हैं कि मां बनना हर महिला के जीवन का खूबसूरत पल होता है। जब आपके भीतर एक नन्ही सी जान धड़कने लगती है, तो आपकी पूरी दुनिया बदल जाती है। इस सफर में जितनी खुशी होती है, उतना ही मन में डर और अनगिनत सवाल भी होते हैं जैसे कि - "क्या मैं जो खा रही हूँ वो सही है?", "क्या मेरा उठना-बैठना बच्चे के लिए सुरक्षित है?" और सबसे बड़ा सवाल कि "प्रेगनेंसी में योग" करना कितना सही है?
अगर आप भी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि इस दौरान कौन से कदम उठाने चाहिए, तो घबराइए मत। सीएमआरआई (CMRI) के अनुभवी और संवेदनशील विशेषज्ञों की टीम हमेशा आपकी इस खूबसूरत यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए आपके साथ है। अपनी और अपने आने वाले बच्चे की बेहतर सेहत के लिए आज ही हमारे अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों से अपॉइंटमेंट बुक करें और एक सुरक्षित मातृत्व की ओर कदम बढ़ाएं।
अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि जो योग वे सालों से करती आ रही हैं, वही प्रेगनेंसी में भी जारी रखा जा सकता है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में 'रिलैक्सिन' (Relaxin) नाम का हार्मोन तेजी से रिलीज होता है, जो आपके लिगामेंट्स और जोड़ों को ढीला करता है ताकि डिलीवरी में आसानी हो। ऐसे में नॉर्मल योग करने से जोड़ों में चोट या खिंचाव का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए 'प्रीनेटल योगा' (Prenatal Yoga) को डिजाइन किया गया है।
गर्भावस्था के दौरान शरीर के अंदरूनी और बाहरी हिस्से में जो बदलाव आते हैं, उन्हें समझे बिना योग करना खतरनाक हो सकता है। रेगुलर योगा और प्रीनेटल योगा के बीच के अंतर को समझना हर गर्भवती महिला के लिए बेहद जरूरी है -

जब आप प्रेगनेंसी के दौर से गुजर रही होती हैं, तो आपके मन में अक्सर यह सवाल घूमता है कि प्रेगनेंसी में कौन कौन से योग करना चाहिए? मेडिकल रिसर्च और स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, निम्नलिखित योगासन इस समय में सबसे ज्यादा सुरक्षित और असरदार माने गए हैं -
यह आसन रीढ़ की हड्डी के लिए एक वरदान की तरह है। प्रेगनेंसी में जैसे-जैसे बच्चे का वजन बढ़ता है, महिलाओं की पीठ के निचले हिस्से (Lower Back) पर बहुत ज्यादा दबाव आने लगता है। मार्जरीआसन करने से रीढ़ की हड्डी लचीली बनती है, पीठ का दर्द दूर होता है और यह बच्चे को सही पोजीशन (Head-down position) में आने में भी मदद करता है।
अगर आप जानना चाहती हैं कि प्रेगनेंसी में योग करने का सबसे बड़ा फायदा पेल्विक एरिया को कैसे मिलता है, तो तितली आसन इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। यह हिप्स को ओपन करता है और जांघों व पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। नियमित रूप से बद्ध कोणासन करने से नॉर्मल डिलीवरी के समय होने वाले स्ट्रेस और दर्द को सहने में मदद मिलती है।
गर्भावस्था में वजन बढ़ने के कारण शरीर का सेंटर ऑफ ग्रेविटी बदल जाता है, जिससे कई बार महिलाएं संतुलन खोने लगती हैं। ताड़ासन करने से शरीर का पोस्चर (Posture) सुधरता है, पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पूरे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।
मानसिक शांति के लिए अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम सबसे सुरक्षित हैं। यह प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले मूड स्विंग्स, एंग्जायटी और डिप्रेशन को दूर रखने में मदद करते हैं।
मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रीनेटल योगा मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है -
यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी समस्या है, तो गाइनोकोलॉजिस्ट की अनुमति के बिना योग शुरू न करें:
खतरे के संकेत: चक्कर आना, सिरदर्द, सीने में दर्द, योनि से पानी/खून का रिसाव होना या बच्चे की हलचल कम महसूस होने पर योग तुरंत रोक दें और डॉक्टर से परामर्श लें।
प्रीनेटल योग बेहद सुरक्षित और फायदेमंद है, बशर्ते इसे सही गाइडेंस में किया जाए। इंटरनेट की आधी-अधूरी जानकारी या रैंडम वीडियो देखकर खुद से प्रयोग करने से बचें। सुरक्षा सबसे पहले आती है, इसलिए कोई भी नया आसन शुरू करने से पहले हमेशा एक योग्य और अनुभवी डॉक्टर या विशेषज्ञ मेडिकल टीम की राय अवश्य लें। इसके लिए आप हमारे अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं।
नहीं, जिन महिलाओं की प्रेगनेंसी में कॉम्प्लिकेशन हैं (जैसे प्लेसेंटा प्रीविया या प्री-टर्म लेबर का खतरा), उन्हें योग नहीं करना चाहिए। योग शुरू करने से पहले हमेशा अपनी गाइनोकोलॉजिस्ट से हरी झंडी जरूर लें।
प्रेगनेंसी में मार्जरीआसन (Cat-Cow Pose), बद्ध कोणासन (Butterfly Pose), ताड़ासन और दीवार के सहारे किए जाने वाले हल्के स्ट्रेचिंग आसन सबसे ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद माने जाते हैं।
हां, प्रीनेटल योग पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाता है। इसके साथ ही सांस लेने की सही तकनीक (Breathing techniques) प्रसव के समय दर्द को सहने और नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ाने में मदद करती है।
आमतौर पर, पहली तिमाही (पहले 3 महीने) के बाद, यानी चौथे महीने से प्रीनेटल योग शुरू करना सबसे सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि शुरुआती 3 महीनों में मिसकैरेज का रिस्क सबसे ज्यादा होता है।
बिल्कुल, योग करने से शरीर में हैप्पी हार्मोन्स (एंडोर्फिन) रिलीज होते हैं जो तनाव और एंग्जायटी को कम करते हैं। साथ ही, कोमल स्ट्रेचिंग से पीठ और कूल्हों के दर्द में भारी आराम मिलता है।
पेट के बल लेटने वाले आसन (भुजंगासन), पीठ के बल लेटने वाले आसन (आखिरी महीनों में), गहरे मरोड़ वाले (Deep Twists) और शीर्षासन जैसे उलटे होने वाले आसनों से पूरी तरह बचना चाहिए।
नहीं, बिना किसी सर्टिफाइड प्रीनेटल योग एक्सपर्ट के घर पर अकेले योग करना सुरक्षित नहीं है। गलत पोस्चर या गलत आसन से बच्चे को नुकसान पहुंच सकता है। हमेशा किसी विशेषज्ञ की देखरेख में ही योग करें।
हां, मेडिकल रिसर्च के अनुसार नियमित रूप से सुरक्षित प्रीनेटल योग और वॉक करने से शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी सुधरती है, जिससे गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रण में रहता है।
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Dr. Manjari Chatterjee is a Consultant Obstetrician & Gynaecologist Dept. at CMRI, Kolkata with over 15 years of experience. She specializes in high-risk obstetrics, infertility procedures, and complex gynaecology including IVF, fibroid & ovary surgeries.
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